ब्यावर क्षेत्र के निवासियों को पहीले से बेहतर होने का अहसास कैसे हों?

रचनाकार: वासुदेव मंगल


केन्द्र सरकार की उपलब्धियों का अहसास ब्यावरवासियों को हो ऐसा कोई काम ब्यावर क्षेत्र में नहीं करवाया गया। जबकि वर्तमान में पूरे देश में फील गुड का नारा प्रिन्ट मिडिया व इलेक्ट्र्ोनिक मिडिया से दिया जा रहा तब ब्यावर के सामने पाली, भीलवाड़ा, राजसमन्द व पन्द्रह अन्य जिलें अपना कोई अस्तित्व नहीं रखते है। ब्यावर को काॅंग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी दोनों ही दलों ने अपनी उपेक्षा का शिकार बनाया है। ब्यावर को जिला बनाने का मुद्दा पिछले कई दशकों से विचारधीन है जब चुनाव आते है तो इस मुद्दे को उछाल दिया जाता है फिर जन प्रतिनिधि चुप होकर बैठ जाते है। वर्तमान मुख्यमऩ्त्री वसुन्धरा राजे ने मुख्यमंत्री बनने से पूर्व अपनी परिवर्तन यात्रा के दौरान ब्यावर को जिला बनाने के बारे में आश्वासन दिया था। क्या माननीया मुख्यमन्त्री बसुन्धराजी अब ब्यावर को जिला बनाकर अपना आश्वासन क्रियान्वित करेंगीं? जबकि वर्तमान में विधायक भी उनकी पार्टी के देवीशंकरजी भूतड़ा है।  
पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान विधायक डा. के. सी. चैधरी द्वारा एशियन डबलपमेन्ट बैंक योजना में ब्यावर को शामिल करने व शहर के विकास पर साठ करोड़ रूपयो की राशि खर्च करने की घोषणा की गई थी। परन्तु अब कहा जा रहा है कि ब्यावर ए डी बी योजना का लाभ उठाने की योग्यता नहीं रखता। ब्यावर के लोगों को उम्मीद है कि वसु सरकार व भूतड़ा के कार्यकाल में ब्यावर शहर जिला बनेगा जिसके बाद ही उन्हें वास्वतिक फील गुड हो सकेगा।  
अजमेर संसदीय सीट से जुडे़ ब्यावर के मतदाता जो कि रासासिंह की झोली में चार बार भर भर कर वोट देते रहे आज चुनावी माहौल में रावत से पूछ रहे हैं कि अजमेर जिले में हवाई अड्डा नहीं बना, ब्यावर भीम से होकर जाने वाली फोर लाईन सड़क भीलवाड़ा होकर चली गई, अजमेर को कोई नई ट्र्ेनंे चालू बजट में नहीं मिली। व रेल्वे का जोनल कार्यालय जयपुर चला गया। उनके चार बार के कार्यकाल में ब्यावर जिला तक भी नहीं बन पाया तो इस शहर के लोग कैसे फील गुड महसूस करें? इस शहर के लोगों का सोचना है कि इस शहर में एक भी ऐसा उद्यान व स्थान नहीं है जॅंहा शहर का आम नागरिक कुछ लम्हें ताजगी व खुशी गुजार सके जो 182 साल पुराना सन् 1823 में तत्कालिन ईस्ट इण्डिया कम्पनी के आदेश से बनाया गया कम्पनी बाग वर्तमान में सुभाष बाग व बिचड़ली का तालाब है उसे भी बस-स्टेण्ड में तब्दील किया जा रहा है जिसके एक तरफ बिचड़ली तालाब दूसरी तरफ सुभाष उद्यान और सामने की ओर मसानी नदी और शमसान है। ऐसी जगह जो 181 साल से पर्यावरण का स्थान है, उसे जल और वायु व घ्वनि से प्रदूषित किया जा रहा है। कभी शहर के चारों मुख्य बाजारों की तीस फीट चैड़ी सड़कों के दोंनों ओर दस-दस फीट की पगडण्डी पर 70 फीट के फासले पर नीम के छायादार गोल घुमेर पेड़ लगे हुए थे जो सोन्दर्यीकरण का एक ज्वलन्त उदाहरण था। लेकिन आज शहर के बाजार अतिक्रमण से अटे पडे है। अतिक्रमण हटाने के नाम पर पटरियों को तोड़ा जा रहा है जिससे बाजार की गंदे पानी की नालियों का लेवल सड़क के बराबर हो जाएगा। परिणामस्वरूप ब्यावर का चांग गेट जो एक उंची पहाड़ी पर बनाया हुआ है और जिस पाली बाजार का ढ़लान पूर्व उत्तर दिशा की ओर है बरसात के मौसम में सम्पूर्ण पाली बाजार एक पानी की झील बन जाया करेगा। यह बात अभी पटरियों को तोड़ते वक्त सोचने की है कि इस बाजार की सड़क का भविष्य बरसात में कैसा होगा? इसके अतिरिक्त एक बात ओर ध्यान देने योग्य है कि सन् 1988 से नगर परिषद् बोर्ड मुख्य बाजारों के दोनो ओर गन्दे पानी की नालियों के उपर दूकान के आगे के दस दस फीट खुले चबूतरों को भी बेचकर दूकानदार को पक्के निर्माण की स्वीकृति देकर बीस फीट चैड़ाई बाजार की स्वत ही कम करदी जिससे अतिक्रमण की यह समस्या विस्फोटक हो गई और बाजार प्रदूषित हो गए।

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