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प्रकृति का अनुपम सौन्दर्य
दूधालेश्वर महादेव

लेखक: वासुदेव मंगल 
अरावली की पर्वत श्रृँखलाओं के मध्य अजमेर राजसमन्द और पाली जिले की सीमा पर ब्यावर से 75 किलोमीटर दूर स्थित है। इस स्थान पर जाने के लिये उदयपुर मार्ग पर जवाजा से 20 किलोमीटर दूर स्थित जस्साखेड़ा चैराहे से बराखन मार्ग पर आगे दूधालेश्वर महादेव तक पक्की डामर की सड़क जाती है।
इस स्थान की प्राकृतिक छटा देखकर पर्यटक का मन उसी में रमने को करता है। हरे भरे पहाड़ों पर चहकती भाॅंति भाँति की ऱ्ग बिरंगी चिडि़याँ, उछलते कूदते बन्दर, नाचते मोर और कभी कभी जॅंगल से निकलकर बाहर आ जाते चीते, बघेरे और रींछ यहाँ की वन्य सम्पदा के प्रचुर भण्डार के प्रमाण देते है।


यह स्थान प्राकृतिक सौन्दर्य से सराबोर एक ऐसा मनोरम स्थान है जहाँ सावन के महीने में तो मानो भगवान शंकर स्वँय यहाँ पर आकर रहने लगे हो। कल कल बहते झरनों का संगीत सुनाता रपटों से बहता निर्मल व स्वस्छ जल, आयुर्वेदिक औषधियुक्त पौघों की खुशबू से महकता वयहाँ का वातावरण तथा औषधीय गुणों से युक्त शीतल जल शहरों की भीड़भाड़ व प्रदूषण से एकदम मुक्त ऐसा ठंडा क्षेत्र यहाँ कश्मीर का सा आभास होने लगे।
इन दिनों दूधालेश्वर महादेव पर आस पास के ही नहीं वरन् दूर दराज के लोगों की भारी भीड़ इस प्राकृतिक नजारे का मजा लूटने हेतु उमड़ रहीं है। पाली, राजसमन्द, उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, जिले के लोगों ने तो पिकनिक भ्रमण के लिए इस जगह को अपनी पहली पसन्द बना रक्खा है। आगन्तुकों के स्नान तथा भोजन बनाने के लिये भी यहाँ पर्याप्त सुविधाएँ है।


इस क्षेत्र के प्राकृतिक उपहार नैसर्गिक आनन्द लूटने हेतु अधिकाधिक परिवार सामाजिक संस्थॉंए, विद्यालय तथा समूह यहाँ पर रोजमर्रा सावन के महीने में आते हैं और प्रकृति की इस अद्भूत छठा का आनन्द प्राप्त करते है। ईश्वर ने भी क्या वास्तव में यहाँ सुन्दर रचना का निर्माण किया है। मानव मन बरबस ही इस स्थान की ओर आकर्षित हुए बिना नहीं रहता।

 

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