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‘ब्यावर’ इतिहास के झरोखे से.......
www.beawarhistory.com
✍वासुदेव मंगल की कलम से....... |
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छायाकार - प्रवीण मंगल (फोटो जर्नलिस्ट)
मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर
Email - praveenmangal2012@gmail.com
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नगर टाउन हॉल के प्रगति का सफर -
14 फरवरी को ब्यावर नगर-परिषद के वर्तमान परिसरकाल्विन हॉल (नेहरू भवन) को
116 साल पूरे हाने पर विशेष
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आलेख प्रस्तुतकर्ता-वासुदेव मंगल
1. ब्यावर व मेरवाड़ा स्टेट के संस्थापक ड़िक्सन ने अपने काल में मेरवाड़ा व
नया शहर के नाम से दीवानी एवं फौजदारी व्यवस्था बनाये रखी।
2. इनका यह काल का सन् 1836 की 1 फरवरी से 25 जून 1857ई.
3. अपने समय में उन्होंने ब्यावर निवासियों को जमीन के पट्टे नया नगर के
नाम से दिये।
4. तब ईस्ट इण्डिया कम्पनी की सल्तनत लागू थी।
5. 1 दिसम्बर 1858ई. को ब्रिटिश सरकार ने भारत के शासन की बागडोर अपने हाथ
में ली।
6. ब्रिटिश सरकार ने मेरवाड़ा स्टेट को बरकरार रखते हुए इसके मुख्यालय नया
नगर का नाम करण ब्यावर रखते हुए 1 मई सन् 1867 ई. राजपूताना में सबसे पहिली
म्युनिसिपैल्टी (स्थानीय प्रशासनिक संस्था) कायम की।
7. यह संस्था भी उसी स्थान पर ही काम करने लगी जहाँ पर पहिले डिक्सन के
जमाने में कार्यालय था।
8. यह कार्यालय वर्तमान में लोढ़ा मार्केट लोहिया बाजार वाला नोहरा था।
9. ब्यावर म्युनिसिपल की स्थापना को 1 मई को 150वाँ दिवस अर्थात् 149 वर्ष
पूरे हो जायेंगे।
10. ब्रिटिश सरकार ब्यावर अंग्रेजी रियासत के कमिष्नर की नियुक्ति स्वयं
करती थी।
11. उनके सारे प्रशासनिक, न्यायिक, संचार, रेल सेवा, शिक्षा, चिकित्सा,
सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक, धार्मिक, सुरक्षा राजस्व इत्यादि सारे कार्य
मेरवाडा ब्यावर के नाम से आरम्भ से लेकर हो रहे थे जब तक यह व्यवस्था 31
अक्टुबर 1956 तक मेरवाड़ा राज्य की ब्यावर में लागू रही थी।
12. सोची समझी चाल के तहत् राजस्थान की तत्कालीन सरकार ने मेरवाड़ा राज्य का
नामोनिशान मिटाने के गरज से इस मेरवाड़ा राज्य की सारी व्यवस्था राजस्थान
राज्य में 1 नवम्बर 1956 को मिलाते वक्त राज्य को क्रम अवनत करते हुए जिला
न बनाकर मेरवाड़ा स्टेट को जबरिया उपखण्ड बना दिया।
13. यहाँ ब्यावर क्षेत्र की अर्थात् मेरवाड़ा स्टेट की बर्बादी शुरू हुई जो
आज दिन तक भी बरकरार है।
14. वर्तमान में टाउन हॉल की आधारशिला तत्कालिन अजमेर मेरवाड़ा के चीफ
कमिष्नर मिस्टर ई.जी. कोल्विन ने रक्खी।
15. यह ईमारत स्काटलैण्ड के एडिनबरा के टाऊन हाल का हूबहू नायाब नमूना है
जो बड़ी खुबसूरत और भव्य आकर्षक है।
16. सन् 1911 ई. में ब्रिटेन क्राउन ने भारत की राजधानी कलकत्ता की जगह
दिल्ली बनाई जिसमें पंचम जार्ज द्वारा दरबार लगाया गया।
17. सम्राट पंचम जॉर्ज की शोभा यात्रा हाथी पर चांदी के ओहदे पर जब चाँदनी
चौक दिल्ली से निकल रही थी उसी समय प्रतापसिंह बारहठ ने एक बिल्डिंग की छत
से पंचम जॉर्ज पर बम फेंका। लकिन पंचम जार्ज बच गये।
18. इस दरबार में भारतर्ष से 562 राजा रजवाडो से राजा महाराजाओं ने भाग लिया।
19. इस दरबार में सबसेे पहीले मेरवाड़ा अंग्रेजी रियासत (स्टेट) ब्यावर के
लिये हिन्दू कमिष्नर श्री बृजजीवनलालजी चतुर्तेदी मथुरा वालें की नियुक्ति
की गई।
20. बृजजीवनलाल जी के पहीले 9 प्रशासक केप्टन डाक्स, कैप्टन एच. स्टीवर्ट,
एच.सी.पी. काक, सैयद हुसेन, मेजर डोक्स, केप्टन हुचिन्सन, के. एच. आर. एन,
रिचार्ड, सी. डब्लु वेडिक्गटन सन् 1904 से लेकर 1911 तक रहे जो पुरानी
ईमारत में ही बैठते थे।
21. श्री बृजजीवनलालजी 1911 से इस नई ईमारत काल्विन हाल में बैठने लगे। ये
दसवें सभापति प्रशासक थे जो आज तक 86वें नम्बर की अध्यक्ष श्रीमती बबिता
चौहान (सभापति) हैं। इस इमारत को 14 फरवरी 2016 को आज 106 (एक सौ छः) साल
पूरे हो चुके है।
22. अब तक 77 सभापति (प्रशासक) इस ईमारत से ब्यावर का स्वायत शासन चला चुके
है।
23. सन् 1911ई. में ही बृजजीवन लालजी की सलाह से श्री पोलूरामजी गार्गिया
जैसलमेर को ब्यावर म्युनिसिपल के इसी दरबार में ओक्ट्रॉय सुपरिन्टेन्डेन्ट
के पद पर नियुक्ति दी। चूंकि उस समय ब्यावर (मेरवाड़ा स्टेट) अंग्रेजी
रियासत थी।
24. ब्यावर में ही राजपूताना गजेटियर छपता था जो लीथो स्याही में छापा जाता
था। यह अंग्रेजी शासन की व्यवस्था थी।
25. इस ईमारत (परिसर) में सन् 1902 से लेकर अभी तक 89 आयुक्त (कमिष्नर)
ब्यावर स्वायत्त प्रशासन की देख रेख कर चुकें है।
26. इस परिसर में श्री डब्लु टी रोबिन्स 19.01.1902 में प्रथम आयुक्त थे जो
सन् 1917-18 तक इस पद पर कार्यरत रहे। वर्तमान में श्री मुरारीलाल वर्मा
आर.ए.एस 89वें नम्बर के आयुक्त कार्यरत है।
27. भारत स्वतन्त्र होने के बाद इस परिसर का नाम काल्विन हॉल की जगह इस
कार्यालय का नाम नेहरू भवन रख दिया गया। आज भी यह नेहरू भवन के नाम से ही
जाना जाता है।
28. इस पुनीत अवसर पर ब्यावर नगर परिषद के वर्तमान बोर्ड से लेखक की मांग
है कि 21 फरवरी सन् 2006 के शहर का नाम नया नगर से ब्यावर नाम करनेे के लिये
राजस्थान की राज्य सरकार को जो सर्व सम्मति से तत्कालिन बोर्ड द्वारा
प्रस्ताव पारित कर भेेजा गया था उसको तुरन्त प्रभाव से राज्य सरकार
राजस्थान गजट में अधिसूचित करें इस आशय का पत्र जोर देकर भेजें।
29. नहीं तो तुरन्त प्रभाव से बोर्ड ब्यावर को जिला बनाये जाने के हित में
यह प्रस्ताव पुनः पारित कर राज्य सरकार को बोर्ड की आपतकालीन बैठक के जरिये
भेजे।
30. यह कार्य करना नगर परिषद् बोर्ड को समय रहते हुए करना बहुत आवष्यकता
है।
31. क्योंकि सरकार जिला नहीं बनाने का सीधा बहाना बना लेती है और ब्यावर
विकास के बजाय विनाश के गर्भ में जा रहा है।
32. मेरी ब्यावर के नागरिकों से भी विनम्र प्रार्थना है कि प्रत्येक नागरिक
व संस्था अब से एक पोस्टकार्ड तुरन्त मुख्य मन्त्री वसुन्धराराजे को ब्यावर
को आठ मार्च 2016 के प्रस्तावित बजट में जिला बनाये जाने की घोषणा अवष्य करें
33. यह नगरपालिका राजपूताना की पहीली है। मई 1867 की।
34. सन् 1887 ई. तक कमेटी में 15 सदस्य होते थे।
35. उस समय अध्यक्ष (सभापति) पदेन कमीष्नर हुआ करते थे।
36. सन् 1888 ई. में सदस्यो की संख्या 20 कर दी गई। 5 सदस्य सरकार द्वारा
मनोनीत किये जाते। 9 हिन्दू, 4 मुस्लिम, 2 इसाई।
37. सन् 1897 ई. तक एक तिहाई सदस्य प्रत्येक वर्ष अपना स्थान त्याग देते और
उनके स्थान पर नये सदस्य चुन लिये जाते।
38. सन् 1911 ई. से गैर सरकारी अध्यक्ष बोर्ड द्वारा चुने जाने लगे।
39. सन् 1़947 ई. से नगर 8 वार्डाे में विभक्त कर दिया गया। प्रत्येक वार्ड
से 3 सदस्य चुने जाते। इस प्रकार 24 चुनंे हुए और 3 मनोनित कुल सदस्य कुल
27 सदस्य। इसका कार्यकाल 3 साल कर दिया गया।
40. 27 सदस्यों का सिलसिला सन् 1970ई. तक चलता रहा।
41. सन् 1965 ई. ब्यावर नगरपालिका को क्रमोन्नत कर नगर परिषद् का दर्जा
प्रदान कर दिया गया।
42. सन् 1971 में 8 वार्ड की जगह 22 वार्ड कर दिये गए। प्रत्येक वार्ड से
एक सदस्य चुना जाता। चार स्थान अनुसुचित जाति के सदस्यों के लिये सुरक्षित
व 2 सदस्य मनोनीत किये जाते। इस प्रकार कुल 28 सदस्यों का बोर्ड होता था।
43. ये सदस्य अपन बोर्ड सदस्यों में से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष चुनते।
44. सन् 1़988 ई. में नगर सीमा का विस्तार हो जाने के कारण वार्डो की
स्ंख्या 35 कर दी गई। समय सीमा बोर्ड की 5 साल की।
45. बाद में बोर्ड की सदस्य चुने हुए 45 है और पाँच सदस्य सरकार द्वारा
मनोनीत किये जाते है।
इस अवसर पर शुभकामनाओं के साथ। सादर वन्दे। जय भारत। जय ब्यावर
शुभेच्छु- वासुदेव मंगल
जागरूक एवं वरिष्ठ नागरिक, ब्यावर
14-02-2026
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ब्यावर के गौरवमयी अतीत के पुर्नस्थापन हेतु कृत-संकल्प
इतिहासविज्ञ एवं लेखक : वासुदेव मंगल
CAIIB (1975) - Retd. Banker
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