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‘ब्यावर’ इतिहास के झरोखे से.......
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✍वासुदेव मंगल की कलम से....... |
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छायाकार - प्रवीण मंगल (फोटो जर्नलिस्ट)
मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर
Email - praveenmangal2012@gmail.com
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14 फरवरी को हालेण्ड म्युनिसिपल स्कूल अर्थात
जिसका सन् 1950 में नामकरण पटेल स्कूल कर दिया गया था, के 115वें वर्ष होने
पर विशेष
राजकीय पटेल सीनियर उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय का इतिहास
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लेखक - वासुदेव मंगल , ब्यावर
कर्नल डि़क्सन मेरवाड़ा के नागरिकों के प्रथम कमीश्नर बनने के पश्चात, सन्
1850 ई0 के, लगभग ब्यावर के नागरिकों के बच्चों के लिए एक स्कूल खोला जिसमें
कक्षा चार तक, हिन्दी व ऊर्दू की षिक्षा दी जाती थी। यह स्कूल सन् 1877 के
बाद लोअर मिडि़ल स्कूल (कक्षा 6 तक) बना दिया गया। श्री नृसिंहदासजी इस
विद्यालय के प्रधानाध्यापक बनाये गये। आप सिखवाल ब्राहम्ण थे व मकरेड़ा के
निवासी थे।
यह स्कूल ब्यावर में म्युनिसिपल कमेटी बनने पर कमेटी द्वारा संचालित किया
जाने लगा। श्री नरसिंगदासजी, अजमेर राजकीय स्कूल में स्थानान्तरित कर दिये
गए और कमेटी ने इस स्कूल को बर्नाक्यूलर मिडिल (कक्षा 7) तक स्कूल बनाकर
श्री अजीम बक्षजी को प्रधानाध्यापक नियुक्त किया।
यह स्कूल सरागवगी मौहल्ले में चलता था, जहाँ वर्तमान में पण्डि़त मार्केट
है। श्री गया प्रशादजी (बी.टी.सी. ट्रेण्ड) प्रधानाध्यापक नियुक्त हुए।
अजमेर सरकार ने उनको हैरिस साहब के अधीन उप जिला विद्यालय, निरीक्षक बनाकर
अजमेर में नियुक्त कर दिया। इनके स्थान पर ब्यावर में, श्री छीतरमलजी और
उनके बाद गणेशलालाजी लाटा व श्री गणेशलालाजी डक, क्रमश प्रधानध्यापक हुए।
यह स्कूल, 14 फरवरी सन् 1910 ई0 में राष्ट्रीय राज मार्ग संख्या 8 के ठीक
टाऊन हाॅल परिसर के सामने, सड़क के उस पार दाहिनी ओर स्कूल का नया परिसर
बनने पर सरावगी मौहल्ले से इस परिसर में स्थानान्तरित कर दिया गया।
इस म्युनिसिपल स्कूल का नाम हाॅलेण्ड स्कूल (तत्कालीन चीफ कमिष्नर के नाम)
पर था।
सन् 1950 ई0 में श्री हरिप्रषादजी अगरवाल द्वारा स्वतन्त्रता प्राप्ति के
पष्चात् सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर इस स्कूल का नाम पटेल का वृहत तेल
चित्र बनाकर श्रीमती विजयलक्ष्मी पण्डित के कर कमलों से इस चित्र का अनावरण
करवाकर पटेल म्युनिसिपल मिडिल स्कूल रख दिया गया।
सन् 1955 ई0 में अजमेर मेरवाड़ा राज्य के षिक्षा मन्त्री श्री बृजमोहन लालजी
शर्मा के प्रयास से यह स्कूल राजकीय स्कूल बना दिया गया। उस वक्त इस स्कूल
में जगदीश प्रशादजी अगरवाल (हरिप्रशादजी के बड़े भाई) प्रधानाध्यपक थे। इसी
समय में इस स्कूल के नये एक विशाल भवन का निर्माण भी इसी से बांई ओर लगते
हुए पीछे की तरफ शर्माजी के प्रयास से करवा दिया गया।
उस समय इस स्कूल को हाई स्कूल व फिर मल्टीरपज् हायर सैकेण्ड़री स्कूल बनाया
गया। इस समय स्कूल में मोहनलालजी मुज्जू साहिब को नियुक्ति दी गई। राजकीय
पटेल मल्टीपरमपज् हायर सैकेण्डरी स्कूल में इन्जिनियरिंग की कक्षाएं भी खोली
गई थी। किन्तु राजस्थान प्रदेष में अजमेर मेरवाडा मिल जाने के बाद यहाँ से
इन्जिनियरिंग की कक्षाऐं बन्द कर दी गई।
अब इसी राजकीय पटेल हायर सेकेण्डरी स्कूल में उन्हीं पुरानी मषीनों का
उपयोग कर ‘सीखा कमाओ’ योजना के अन्तर्गत कार्य अनुभव योजना चलाई गई व
फर्नीचर आदि का काफी मात्रा में उत्पादन किया जाता रहा। सन् 1975 के
अक्टूबर माह से इस स्कूल में फर्नीचर मेकिंग इन्जिनियरिंग की कक्षाएँ चालू
की गई।
इस स्कूल में पहीले प्रधानाध्यापक का पद था किन्तु सन् 1972 में यहाँ
आचार्य का पद हो गया। इस पद पर श्री ईष्वर शरण माथुर प्रथम आचार्य नियुक्त
हुए जो बाद में अजमेर में जिला षिक्षाधिकारी के पद पर पदोन्नत हुए। वर्तमान
में, इस विद्यालय में, सीनियर सेकेण्डरी की कला वाणिज्य व विज्ञान की
कक्षाएँ भी चलाई जा रही है। अतः अब यह राजकीय पटेल सीनियर उच्चतर माध्यमिक
विद्यालय है।
ब्यावर म्युनिसिपल कमेटी ने नगर के विभिन्न मौहल्लों में प्राथमिक शालाएँ
खोल रक्खी थी। ये सभी पाठषालाएँ हालैण्ड स्कूल से और बाद में राजकीय पटेल
प्राथमिक स्कूल के अधीन चलती थी। इन स्कूलों को भी अजमेर मेरवाड़ा राज्य की
सरकार ने सन् 1955 ई0 में अपने हाथ में ले लिया था।
मेरवाड़ा राज्य अर्थात् ब्यावर को राजस्थान प्रदेश में 1 नवम्बर सन् 1956
को मिलाया गया। हाँलाकि राजस्थान प्रदेष की तत्कालिन राज्य सरकार ने
वादाखिलाफी कर ब्यावर को जिला तो नहीं बनाया परन्तु शिक्षा के क्षेत्र में
ब्यावर क्षेत्र में निरन्तर स्कूलों की संख्या बढ़ाई जाती रही। आवश्कतानुसार
ब्यावर में इन स्कूलों के निरीक्षण कार्य हेतु एक वरिष्ठ जिला विद्यालय
निरीक्षक का कार्यालय भी नृसिंह-दरजी गली के चैराहे की बिल्डिंग में खोला
गया जिसकी देखरेख में ब्यावर में उच्च प्राथमिक विद्यालय खुले तथा कई पुराने
प्राथमिक विद्यालयों को माध्यमिक स्तर में क्रमौन्नत किया गया। वरिष्ठ
विद्यालय उपजिला शिक्षाधिकारी के पद पर श्री लालचन्द जी डोसी को लगाया गया।
कई वर्षों तक यह कार्यालय काम करता रहा। बाद में राजस्थान राज्य की सरकार
ने ब्यावर क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार करते हुए इस कार्यालय को बन्द कर
दिया।
14-02-2026 |
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ब्यावर के गौरवमयी अतीत के पुर्नस्थापन हेतु कृत-संकल्प
इतिहासविज्ञ एवं लेखक : वासुदेव मंगल
CAIIB (1975) - Retd. Banker
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