‘ब्यावर’ इतिहास के झरोखे से....... 
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✍वासुदेव मंगल की कलम से.......  

छायाकार - प्रवीण मंगल (फोटो जर्नलिस्‍ट)
मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर
Email - praveenmangal2012@gmail.com


दिनांक 2, 3 और 4 मार्च को ब्यावर में
होली, डाण्डिया गैर नृत्य और गुलाल का बादशाह मेला
भावनाओं का पर्व पर विशेष

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आलेखः वासुदेव मंगल स्वतन्त्र लेखक
होली का पावन पर्व रंगों का उत्सव है। रंग जो दिलों तक उतर जाए। हर दिल अजीज के गीले-सिकवे होली के अलबेले त्यौंहार पर दूर हो जाएं ऐसा है होली का मद मस्त, मन भावन उमंगों भरा मद मस्त उत्सव। यह त्यौहार सामाजिक समरसता व मानवीय सम्बन्धों का जीवन्त पर्व है जब रिश्तों में आई दरारे भरने और जीवन में नई ऊर्जा भरने का अवसर मिलता है। यह वह अवसर है जीवन की असली खूबसूरती भावनाओं में छिपी है। छोटी-छोटी बातों पर मनमुटाव, अहंकार और गलत फहमियाँ रिश्तों के बीच दीवार खड़ी कर देती हैं। ऐसे में होली एक अवसर बनकर आती है, इन दीवारों को गिराने और अपनत्व का पूल बनाने का।
मानवीय सन्देश: जब हम एक दूसरे को रंग लगाते हैं, तो यह प्रतीक होता है कि हम भेदभाव, कटुता और दूरी को पीछे छोड़ रहे हैं। रंगों की यह परम्परा हमें सिखाती है कि जीवन में विविधता ही सुन्दरता है। अलग अलग स्वभाव विचार और संस्कृतियाँ मिलकर ही समाज को समृद्ध बनाती है। अगर हम इन विविधताओं को स्वीकार करले, तो अधिकांश विवाद स्वतः ही समाप्त हो सकते हैं। मन मुटाव अक्सर संवाद की कमी से जन्म लेते हैं। हम, अपनी बात कहने में देर कर देते हैं और दूसरों की बात सुनने का धैर्य खो बैठते हैं। त्यौहार संवाद का स्वाभाविक अवसर प्रदान करते हैं। एक सच्ची मुस्कान और एक आत्मीय आलिंगन वर्षों की दूरी को मिटा सकता है। होली हमें यही सहजता और खुलेपन का पाठ पढ़ाती है।
आत्मीयतारूपी सहभागिता: होली का त्यौहार आत्मीयता के भाव को प्रकट करता है। इस पर्व पर जाति वर्ग भाषा या आर्थिक स्थिति की दीवारें रंगों के सामने फीकी पड़ जाती है। जब पूरा समाज उत्सव मनाता है तो सहयोग की भावना पनपती है। हमे यह समझना होगा कि आज इस युग में समय के साथ दिखावे की प्रवृति बलवती हुई है। महंगे आयोजन व प्रदर्शन और सोशल मीडिया की रोड पर छवि निर्माण की होड ने त्यौहारों की आत्मा को कहीं न कहीं झकझोर दिया है। होली का वास्तविक आनन्द सादगी, आत्मीयता और सादगी में ही है। अपेक्षाओं और प्रतिस्पर्धा से मुक्त होकर उत्सव मनाने में ही सच्ची अनुभूति और आनन्द प्राप्त होता है।
अवसाद के युग मे होली आनन्द का अवसरः तनाव और चिन्ताग्रस्त जीवन में होली का पर्व हमे आनन्द की अनुभूति प्रदान करता है। इस पर्व पर हम खुलकर हँसने, गाने और आनन्द लेने का अवसर देता है। सकारात्मक भावनाएँ मन को हल्का करती है और नई ऊर्जा प्रदान करती है। मन के भीतर एक शान्ति और सन्तोष कर अनुभव होता है। होली आत्म मंथन का मौका भी देती है। अनजाने में हमने किसी प्राणी की आत्मा को आहत किया है तो आत्मशुद्धि को अवसर भी होली का त्यौहार है। इस पर्व पर अपनी गलती में सुधार कर रिश्तों में जान फूंकने का होली का ही त्यौंहार माकूल है।
भावनाओं का पर्व होलीः जीवन का असली रंगे प्रेम और अपनत्व है। दिलों में स्नेह के रंग स्थायी होते हैं। यदि हम इस त्यौहार की भावना को अपने दैनिक जीवन में उतार लें, तो हर दिन एक उत्सव बन सकता है आईये इस होली पर हम एक संकल्प लें कि मन मुटाब को पीछे छोडेंगे संवाद को मजबूत बनाएंगे और रिश्तों को प्राथमिकता देंगे तब ही जीवन सचमुच रंगों से भर उठता है
ब्यावर में होली के इन मन भावन रंगों के पर्व होली दिनांक 2 मार्च, गैर डाण्डिया नृत्य 3 मार्च और हर दिल अजीज का गुलाल के बादशाह मेले 4 मार्च 2026 पर लेखक एवं परिजनों की ढ़ेर सारी शुभकामनाओं के साथ।
02-03-2026

ब्यावर के गौरवमयी अतीत के पुर्नस्थापन हेतु कृत-संकल्प

इतिहासविज्ञ एवं लेखक : वासुदेव मंगल
CAIIB (1975) - Retd. Banker

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