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✍वासुदेव मंगल की कलम से.......  

छायाकार - प्रवीण मंगल (फोटो जर्नलिस्‍ट)
मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर
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दिनांक 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्री पर विशेष
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आलेख: वासूदेव मंगल, ब्यावर
पहला: भीतरी आनन्द का भावः शिव आराधना आध्यात्मिक गुणों की खान है। आराध्य देव जीवन जीने की कला है। शिव सहज है। सत्य ही शिव है। शिव ही सुन्दर है।
महादेव हर परिस्थिति में शान्त और धैर्यवान रहने वाले योगी है। जीवन मे आनन्दित रहने के लिए मन का सुकून जरूरी है। शान्ति प्राप्त करने के लिए मन और मस्तिष्क का शान्त रहना बहुत जरूरी है। अतः आवश्यक है कि दिल और दिमाग को स्थिर रक्खा जाए।
जब विपरित हालत हो जाए तो ऐसे में शिव स्वरूप ही शान्ति प्रदान करते हैं। प्रतिकूल परिस्थिति मंे शान्त मन से डटे रहना सन्तुष्टि और आत्म-विश्वास प्रदान करता है। भगवान शिव सिखाते हैं खुद को समझना और जो है उसे सुकून के साथ जीना। अपनो का मन समझने से मानवीय भाव को बल मिलता जिससे भीतरी आनन्द की प्राप्ति होती है। अतः भीतरी आनन्द का भाव भगवान शिव मंे नीहित है।
दूसराः प्रकृति का साथः आज के जीवन मे बहुत सी परेशानियों का कारण नेचर से दूर होना है। भगवान शंकर का प्रकृति से जुडाव लिए होना मन और मस्तिष्क को सुकून और शान्ति प्रदान करता है। माटी से जुड़ाव और प्रकृति की गोद मे जीने का सुकूनदायी अहसास उनके ईश्वरीय स्वरूप को और सहज बना देता है। आक, धतूरे और बेल पत्र से प्रसन्न होने वाले शिव की आराधना कहीं न कहीं प्रकृति पूजना ही तो सिखाती है। बढ़ती दिखावा प्रवृत्ति के परिवेश मे प्रकृति से जुड़ा जीवन ही मन को थाम सकता है प्रकृति पोषक सोच भी हमारी पारिवारिक व्यवस्था को थामने का आधार भी बन सकती है।
तीसरा: स्वभाव की सरलता: असल मेें शिव योगी ही नहीं पारिवारिक भी है। भगवान शिव का सरल स्वभाव बहुत बड़ी सीख लिए है। महादेव का सौम्य स्वरूप परिवार से जुड़कर रहने का पाठ पढ़ाता है तांडव करने वाले नटराज और भक्तों के बाबा भोलेनाथ हर हाल मे इन्सान को उदारवादी सीख देने वाले है। जीवन मे बड़ी से बड़ी समस्या को मन और मस्तिष्क की शान्ति सरल बना देती है। समझना जरूरी है कि स्वभाव की सहजता से ही शिवजी देव, दानव, भूत, पिशाच, गण सभी को साथ लेकर चलते है सार्थक और सकारात्मक विचारों से धरातल पर रिश्तों की बुनियाद मजबूत होती है। शिव पार्वती के विवाह की वर्षगाँठ के रूप में मनाया जाने वाला यह महा शिवरात्री पर्व स्मरण करवाता है कि अपनों परायों को भी सहज रूप से अपनाना जरूरी है। महा शिवरात्री का पर्व मात्र धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं है अपित शिव परिवार से सहजता अपरिग्रह, अपनापन और सहज स्वीकार्यता सीखने का उत्सव है।
महा शिवरात्री के पर्व पर सभी भक्तगणों को लेखक व परिजन की ढ़ेर सारी शुभकामना। आप सपरिवार आनन्दपूर्वक रहे।
अतः कौतुहल भरे वातावरण में शान्ति और सन्तुष्टि का माहौल महाशिवरात्री पर्व पर होता है जो आत्मिक सन्तुष्टि मानव मन को प्रदान करता है।
दिनांक 15.02.2026
 

ब्यावर के गौरवमयी अतीत के पुर्नस्थापन हेतु कृत-संकल्प

इतिहासविज्ञ एवं लेखक : वासुदेव मंगल
CAIIB (1975) - Retd. Banker

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