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ब्यावर
में बैंक
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लेख द्वारा: वासुदेव मंगल, ब्यावर
भाग - 2
सन् 1911 में हिन्दुस्तान की राजधानी कलकता से दिल्ली बनाई गई। इस अवसर पर
ब्रिटेन के शासक पंचम जोर्ज का भारत के दिल्ली मे दरबार लगाया गया जिसमें
सभी पांच सो बासठ देशी राजाओ ने सिरकत की। यह एक यादगार दरबार था जिसमे
ब्यावर मे पहली बार अंग्रेज कमिश्नर की जगह हिन्दू कमिश्नर का प्रस्ताव
पारित किया गया। यों तो ब्यावर स्थापना से बावन सर्राफा बही-बसने आरम्भ हो
गए थे बुलियन मार्केट मे। इस सर्कल मे वायदे के ट्रान्जेक्शन होते रहे
ब्यावर के मार्केट मे तो बावन सर्राफा मार्केट 1838 से 1910 तक बहत्तरे साल
तक अपने पीक पर था।
लेकिन 1911 के बाद ब्यावर मे सबसे पहले दी ब्यावर सेण्ट्रल कोपरेटिव बैंक
लि. की स्थापना हुई। चूंकि राजपूताना मे मात्र ब्यावर मे ही विभिन्न प्रकार
के तिजारत का बहुत बड़ा केन्द्र था जिसकी गिनती उस समय अन्य आठ शहरों के
तिजारत के साथ होती थीं। ये अन्य केन्द्र थे मीरपुर खास, फाजिल्का, कानपुर,
इन्दौर, बम्बई, राजकोट, भाव नगर और अहमदाबाद। वैसे तो सभी बाबन सर्राफों के
खाते एक दूसरे के साथ परस्पर थे। परन्तु फिर भी सब सर्राफा व्यापार की एक
जगह सुविधा प्राप्त हो इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर एक बैंक खोलकर सबके
खाते उसमे रखने की सुविधा की दृष्टि से ही सबसे पहले ब्यावर में दी ब्यावर
सेण्ट्रल कोपरेटिव बैंक लि. की स्थापना सन् 1912 में की गई जो कोपरेटिव के
स्लोगन पर आधारित थी अर्थात् सबका परस्परे सहयोग एक स्थान पर व्यापारिक सौदों
के लेन देन का बना रहे। इस प्रकार बैंक ब्यावर मे सबसे पहले हुण्डी बिल्टी
की तरह बैंक मे लेन देन करने की प्रथा शुरू की गई। यह बैंक सुविधा इतनी
कारगर रही कि भविष्य में ऐसी सुविधा की अर्जेन्सी महसुस की जाने लगी। आप
देखिये इस बैंक मे क्या वूल, क्या काटन, क्या ग्रेन और क्या अन्य मर्चेण्ट
एकाउण्ट के साथ जनरल कस्टोमर के एकाउण्ट जैसे किसान एवं अन्य सभी ग्राहकों
के खाते खोलकर समस्त लेन देन जमा विथ ड्रा एन्ट्री तुरन्त नकद निकासी व
ट्रान्सफर एन्ट्री की सुविधा एक बैंक नाम की संस्था खोलकर की जाने लगी।
ब्यावर की दी ब्यावर सेन्ट्रल कोपरेटिव बैंक लि. के जरिये प्रयोग इतना सफल
हुआ कि अन्य शहरों मे भी इस प्रकार के बैंक खोले जाने लगे। व्यापार का एक
सफल और सशक्त साधन बैंक का जरिया बना। आज तो साधारण से साधारण आम व्यक्ति
का लेन देन बैंक के मार्फत ही होता है। इसकी इतनी उपयोगिता हो गई कि यह
संस्था ट्रस्टवर्दी मानी जाने लगी। आम व्यक्ति का विश्वास इस संस्था की
उपादेयता पर निर्भर हो गया। आजकल तो यह आवश्यक सेवा हो गई।
यह बैंक तब तक काम करता रहा जब तक इसका दी अजमेर सेण्ट्रल कॉपरेटिव बैंक
लिमिटेड़ में इसका विलीनीकरण हुआ तो आप देखिये ब्यावर तो व्यापार मे भी
प्रयोग की जननी रहा है जहां पर तरह-तरह के सुविधाजनक सफल हुए है। जैसे-
हुण्डी का प्रयोग और इसके बाद बैंकिंग संस्था का प्रयोग। इन प्रथा को आजमाने
पर व्यापारी और हर आम व्यक्ति को बहुत सहुलियत हुई और अब तो यह आवश्यक बात
हो गई। इससे क्रेडिट - गुडविल जैसे लाभ होने लगे व्यापार फ्लोरिश होने लगा
।
आज तो बैंक साधारण से साधारण व्यक्ति के लेन देन के एकाउण्ट का जरिया बन गया
है। ब्यावर में तो यह हुई बैंकिंग प्रणाली के ओपनिंग की शुरूआत।
अब वर्णन करते हैं ब्यावर मे अन्य बैंक खोले जाने का समय समय पर खोलने का
वर्णनः-
बैंकों में अन्य बैंकों की दास्तानः-
(2) जैसा कि आपको 20वीं सदी में सबसे पहले ब्यावर से बैंक खोले जाने की
प्रथा सन् 1912 से आरम्भ हुई थी 1919 में बरतानिया की सरकार अफगानिस्तान को
स्वतन्त्र कर भारत से अलग किया था। उसके बाद सन् 1936 से बर्मा को
स्वतन्त्र कर भारत देश से अलग किया था। अतः अफगानिस्तान बर्मा में भारत की
संस्कृति ही विद्यमान रही। सन् 1936 तक भारत मे अंग्रेजी इम्पीरियल बैंक के
नाम से काम कर रहा था। अतः चार बड़े मेट्रोपोलिटन शहर बम्बई, दिल्ली, कलकत्ता
और मद्रास में मेट्रोप्रोलीटन बैंक कार्यरत थे।
भारत की स्वतन्त्रता के बाद सन् 1955 में भारत में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के
नाम से पूरे भारत में सरकारी बैंक खोला।
ब्यावर में सन् 1941ई0 मे दी भारत बैंक लिमिटेड खोला गया डिक्सन छत्री
चौराहा के पूर्वी-दक्षिणी कोने की दूसरी मंजिल मे। बाद मे यह बैंक दी पंजाब
नेशनल बैंक लिमिटेड मे मिला दिया गया।
सन् 1943 ई० मे भीलवाड़ा के मानसिंगा ने ब्यावर मे दी बैंक ऑफ राजस्थान लि०
कपड़ा बाजार में डिक्सन छत्री के आगे दक्षिण मे पश्चिम दिशा मे खोला।
तत्पश्चात् जयपुर राज घराने ने 26 सितम्बर 1946 मे चौथा बैंक दी बैंक ऑफ
जयपुर लि. शाह मार्कट में खोला। इस प्रकार आप देखे। ब्यावर कोपरेटिव को 115
वर्ष, भारत बैंक को 86 वर्ष और राजस्थान बैंक को 84 वर्ष और जयपुर बैंक को
81 वर्ष हो गए कार्य करते हुए ब्यावर में।
वर्तमान मे राजस्थान बैंक पूर्वी सुनारान गली मेवाड़ी बाजार की आई सी आई सी
आई बैंक के नाम से कार्यरत है। पंजाब नेशनल बैंक डिक्सन छत्री चौराहे से
फत्तेहपुरिया चौराहे के पश्चिमी-दक्षिणी कोने में शिफ्ट हुआ। उसके बाद अब
चौराहे के उत्तर मे एम०पी० छाजेड़ा इनडोर मार्केट मे वर्तमान मे दूसरी मंजिल
अजमेरी बाजार मे कार्यरत है।
जहाँ तक जयपुर बैंक के नामकरण परिवर्तन का सवाल है तो सन् 1959 ई0 मे जयपुर
राजघराने ने सरकारी बैंक बनाकर स्टेट बैंक ऑफ जयपुर के नाम से संचालित होने
लगा। चूंकि राजस्थान प्रदेश भारत देश का राज्य होने से जयपुर रियासत को भी
राजस्थान राज्य में मिला दिया गया 26 जनवरी 1950 को। बाद में सन् 1963 ई.
में बीकानेर ने जयपुर बैंक अपने बैंक में मर्ज कर लिया और इस बैंक का नाम
स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर हो गया। 19 जुलाई 1969 को तत्कालिन भारत
की प्रधानमन्त्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया तब
बैंकों में बम्पर वैकेन्सी क्लेरीकल मे निकली तब ही लेखक की पोस्टिंग भी एस.
बी. बी. जे. मे हुई। जैसा कि 1963 में रोडवेज का राष्ट्रीयकरण हुआ तब लेखक
ने 8 सितम्बर 1966 मे जयपुर में रोड़वेज के सिन्धी केम्प स्थित रीजनल
कार्यालय में एल०डी०सी० (लोअर डिविजन कर्ल्क) की पोस्ट पर कार्य करते आबू
रोड और अजमेर मे तीन साल तक काम कन्फर्म क्लर्क के रूप से काम किया। जैसे
रोडवेज मे 1963 मे ट्रेड यूनियन स्ट्रोंग होने की तरह 1966 मे बैंकों मे भी
ट्रेड यूनियन स्ट्रोंग हुई और बैंकों को राष्ट्रीयकरण हुआ। लेखक ने 16 महीने
आसिन्द मे फिर बाद मे ब्यावर एस. बी. बी.जे. मे कार्य कर साढ़े इक्तीस साल
मे ब्यावर से 31 मार्च सन् 2001 में बैंक से सेवा निवृत हुए। इस प्रकार
लेखक का सेवा निवृत काल 25 साल 4 महीने हो गया।
अब पाँचवे नम्बर पर स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया सन् 1955 में इम्पीरियल बैंक की
जगह भारत सरकार द्वारा पूरे भारत देश मे खोले जाने के साथ साथ एक ब्यावर मे
भी राजस्थान प्रदेश में आठ शहरों में एस.बी.आई. की ब्रान्च खोली गई। अन्य
शहर है जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर, साम्भर, आबूरोड, अलवार और ब्यावर। इस
प्रकार एस. बी. आई. को बहत्तर साल हो गए। जंहा तक एस.बी.बी.जे. बैंक का
ब्यावर मे स्थान परिवर्तन का सवाल है सन् 1965 में के० एम० मार्केट पाली
बाजार 1986 में हेमलानी इण्डोर मार्केट पाली बाजार मे और उसके बाद मे हाईवे
आठ मार्ग रूपबानी सिनेमा के सामने मोड़ पर वर्तमान में कार्यरत है। जो स्टेट
बैंक ग्रुप की सहायक (सब्सीडियरी) होने से एस. बी. आई. में मर्ज कर दी गई।
अब यह बैंक एस.बी.आई. के नाम से कार्यरत है। 31 मार्च 2001 में लेखक हेमलानी
मार्केट से एस.बी.बी.जे. से रिटायर हुए।
सन् 1971 के बाद विभिन्न सरकारी राष्ट्रीयकृत बैंकों ब्यावर में खुलने का
सिलसिला शुरू हो गया जिनके साथ ए.टी.एम. (आटो ट्रान्सफर मशीन) भी हर बैंक
की ब्यावर के विभिन्न स्थानों पर लगने लगी। अब तो ब्यावर मे ए.टी.एम. के
साथ साथ बैंकों का जाल फैल गया। अब आपको बैंक की सुविधा हर जगह उपलब्ध है।
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