‘ब्यावर’ इतिहास के झरोखे से.......
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✍वासुदेव मंगल की कलम से.......

छायाकार - प्रवीण मंगल (फोटो जर्नलिस्‍ट)
मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर
Email - praveenmangal2012@gmail.com

30.07.2026

ब्यावर में बैंक
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लेख द्वारा:  वासुदेव मंगल, ब्यावर
भाग - 2
जैसा भाग एक मे ब्यावर मे बैंकों का इतिहास बताया। अब आपको बैंको का सिनेरिया ब्यावर मे 19 जुलाई 1969 और बाद में 1980 का बताते है।
पहले चरण में जिन निजी बैंकों की पूंजी (केपिटल) 50 (पचास) करोड़ से अधिक थीं। (1) भारतीय स्टेट बैंक (2) स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर (3) पंजाब नेशनल बैंक (4) बैंक ऑफ बड़ौदा (5) इण्डियन बैंक (6) केनरा बैंक (7) यूनाईटेड कॉमर्शियल बैंक और (8) ओरियन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स इस प्रकार आठ बैंक। इनमें से 2017 मे एस बी बी जे एस बी आई में मर्ज हो गया कुल सात बैंक हुए और 2020 में ओरियन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स पंजाब नेशनल बैंक में मर्ज हो गया जो 15 अप्रेल 1980 में राष्ट्रीयकृत हुआ था जिसकी पूंजी 15 अप्रेल 1980 को 200 करोड़ से अधिक थी।
अतः वर्तमान में पब्लिक सेक्टर के 6 सार्वजनिक बैंक ब्यावर मे कार्यरत है। जिनकी एक से ज्यादा ब्राँच और ए.टी.एम. कार्यरत है।
दूसरा: प्राईवेट सेक्टर (निजी बैंक):- (1) आई सी आई सी आई जिसमें दी बैंक ऑफ राजस्थान लि. मर्ज हो गया। (2)एक्सिस बैंक (3) एच.डी.एफ.सी.बैंक (4) बड़ौदा क्षेत्रिय ग्रामीण बैंक, सेन्दड़ा रोड़ पर (5) जन स्माल फाइनेन्स बैंक और (6) ए.यू. स्माल फाइनेन्स बैंक।
इस प्रकार निजी क्षेत्र अर्थात प्राईवेट सेक्टर में भी वर्तमान में ब्यावर मे 6 (छ) बैंक कार्यरत है जिनकी एक या एक से ज्यादा ब्रांच (शाखा) कार्यरत है और ए. टी. एम. भी।
तीसरा: सहकारी क्षेत्र के बैंक ( कोपरेटिव सेक्टर):- (1) ब्यावर अरबन कोपरेटिव बैंक लिमिटेड - इस बैंक की दो ब्राँच है। (2) अजमेर सेण्ट्रल कोपरेटिव बैंक और (3) संजीवनी कोपरेटिव बैंक।
इस प्रकार ब्यावर सिटी मे कुल 15 विभिन्न प्रकार के बैंक कार्यरत है वर्तमान मे जिनमे 6 (छ) सार्वजनिक क्षेत्र के 6 (छ) निजी क्षेत्र मे और 3 (तीन) सहकारी क्षेत्र में है जिनकी एक या एक से ज्यादा ब्रांच और ए. टी. एम. कार्यरत है बैंकिंग सेक्टर में ब्यावर मे।
तो है न ब्यावर व्यापारिक एवं औद्योगिक केन्द्र। अतः बिजनेस में यहां ब्यावर केपिटल मोबिलाइजेशन स्थापना से निरन्तर बना हुआ है। स्वतन्त्रता के पश्चात ब्यावर क्षेत्र का तिजारती सिनेरियो कायम बरकरार रखना चाहिये था सरकार को। इसी प्रकार क्रानिक औद्योगिक स्वरूप भी नष्ट नहीं किया जाना चाहिए था जिनमें तीन क्लोथ मिल्स के साथ दस बारह जिनिंग एण्ड प्रेसिंग कारखाने थे। यह ब्यावर का अतीत का गौरव था गुन्नीसवी और बीसवीं सदी के पूर्वार्ध तक का समय। बाहर से आने वाले व्यापारी तीन-तीन मिलों की चिमनियाँ देखकर ब्यावर को अहदाबाद समझकर यहीं उतर जाते। और जो पांच हजार लोगों को रोजगार दे रहे थे उन सभी कल-कारखानों को बन्द कर दिया। आज तो मशीनों द्वारा ओटाे जेनरेशन (मेन्यूफैक्चरिंग) का जमाना है। आजकल रोजगार कहाँ पड़ा है। जबकि जनसंख्या का बेरोजगारी का घनत्व शत प्रतिशत है। अतः जॉब ओरियन्टेड वर्क होना चाहिये तब ही देश खुशहाल हो सकेगा। महंगाई सुरसा की तरह मुँह बाहें खड़ी है। जिस पर 24 x 7 दिन जी एस टी देश की उपभोक्ता जनता को परेशान किए हुए है जिनका कोई आय का बिल्कुल भी साधन नहीं है उनको भी खाने-पीने तक की उपभोग वस्तुओं यहां तक कि रोटी-कपड़ा-मकान पर, नाश्ते पर और अन्य आधारभूत सुविधाओं पर भी टैक्स देना पड़ता है है जैसे-पानी, हवा आदि अतः उपभोग वस्तुओं और सेवा पर टेक्स नहीं होना चाहिए। साथ हीं आधारभूत आवश्यक हवा,पानी रोशनी, ईंधन, फ्यूअल तथा होटल, ढाबे, रेस्टोरेन्ट मे आवश्यक सेवा कर (सर्विस टेक्स) इत्यादि।
आप देखिये ब्यावर मे ओरियन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स की ब्रान्च 30 मार्च सन् 1998 में खोली गई थी। यह वही बैंक है जिसको लाला सोहनलाल ने लाहौर मे 19 फरवरी 1943ई. में खोला था। लाला सोहनलाल राय बहादुर थे जिनको अंग्रेजों ने पदवी दे रक्खी थी। ब्यावर मे तो इस बैंक की खुलने का सोभाग्य मात्र बिजनेस सेन्टर होना है जहाँ अक्समात व्यापारिक लेखक से गुफ्तगू के जरिये तत्कालिन बैंक के 24 दिसम्बर 1995 को होटल विनोद में चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर श्री एस. के. सोनी साहिब ने जैसलमेर जाते समय ठहरने पर ब्यावर की क्रॉनिक जानकारी ली और ब्यावर मे अपना बैंक खोलने का मन बना लिया।
तो हुआ ना कमाल ओ. बी. सी. (ओरियन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स) के खुलने का इत्तफाक। यह बैंक सन् 2020 से पंजाब नेशनल बैंक मे मर्ज कर दिया गया।
इस प्रकार ब्यावर के स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर को जो स्टेट बैंक ग्रुप का सबसे बड़ा सहायक (सब्सीडियरी) बैंक था को स्टेट बैंक आफ इण्डिया मे अन्य छ सब्सिडियरी बैंको के साथ मर्ज कर दिया गया और नामकरण हो गया एसबीबीजे की जगह एस बी आई जो विनोद होटल, के प्रांगण में भी कार्यरत है वर्तमान मे। इस प्रकार ब्यावर कुल सतरह बैंक कार्यरत थे जिनमें दो बैंकों के मर्ज हो जाने से कुल पन्द्रह बैंक अस्तित्व में है। वर्तमान मे।
अगर सरकार ब्यावर जिले का विकास कराना चाहे तो विकास की पोटोन्शयलिटी तो बहुत है मात्र आवश्यकता है सरकार की ईच्छा शक्ति की क्योंकि इस जिले मे प्राकृतिक सन साधन प्रचुर मात्रा मे है जिनका वैज्ञानिक तरीके से तकनीकी आधार पर दोहन किया जाना है। विकास की मोबिलिटी की रफ्तार चालू करने की देर है फिर आप देखियेगा ब्यावर जिले का सघन और सर्वागीण विकास। ब्यावर जिले का पृष्ठांकित क्षेत्र अविकसित (अन डब्लेप) है जिसका सम्पूर्ण विकास हो सकता है। राष्ट्रीय स्तर के सिमेण्ट प्लाण्ट की तरह अन्य प्रकार के प्लाण्ट भी राष्ट्रीय स्तर के प्लाण्ट लगाने की गुंजाइश है। इनका कच्चा माल फैल्सपार और ग्रेनाइट प्रीसीयस स्टोन बाहर भेजा जाता है। अगर इनके कारखाने ब्यावर में लग जाये तो राजस्व में गुणात्मक ईजाफा होगा और ब्यावर जिला खुशहाल होगा। अतः सरकार को इस पर विचार करना चाहिए क्योंकि यहां पर पावर की, पूंजी की, स्किल्ड लेबर की, मार्केट की कोई कमी नहीं है। सब घटक विद्यमान है।

 

इतिहासविज्ञ एवं लेखक : वासुदेव मंगल
CAIIB (1975) - Retd. Banker

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