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ब्यावर शिक्षण संस्थाए (भाग-दो
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सनातन धर्म राजकीय कॉलेज
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रचनाकार: वासुदेव मंगल, ब्यावर सिटी
स. ध. पहले प्रकाशनी प्राईमरी स्कूल थी। फिर मिडिल स्कूल बनी। कक्षा 6 से 8
तक पढ़ाई तक अब प्रकाशनी हाई स्कूल (पाठशाला) बना दी गई। बिहारीलालजी वर्मा
हेड मास्टर के समय मिडिल मंे तब चटर्जी के निरीक्षण की सिफारिश से इलाहाबाद
बोर्ड ने इस पाठशाला को हाई स्कूल की मान्यता दे दी। सन् 1925 में इसके पहले
बैच की हाई स्कूल परीक्षा का परिणाम सन्तोषजनक रहने से श्री बिहारीलालजी
वर्मा के प्रधानाध्यापक के काल मे लक्ष्मीनारायण माथुर के अध्यक्ष के
निरन्तर प्रयास के बाद दीवान बहादुर प्यारेलालजी भार्गव के अथक सहयोग से स.
ध. प्रकाशनी हाई स्कूल को सन् 1929 ई0 से अजमेर शिक्षा बोर्ड से इन्टर
कॉमर्स कालेज की मान्यता मिल गई और वर्माजी अब प्रिन्सीपल हो गए। श्री
जगदीश नारायणजी जोशी स्कूल मे ड्राइंग टीचर थे। राजस्थान मे मात्र स. ध.
कालेज ही एकमात्र कॉमर्स कॉलेज था जहाँ पर दूर दूर से विधार्थी पढने के लिए
आते थे। जोधपुर, सिरोही, अजमेर आदि से। इनके रहने के लिए छात्रावास का
निर्माण हुआ जिसका नाम गिब्सन होस्टल रखा गया।
विद्यार्थियों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाने से टाटगढ़ रोड पर कालेज के लिए
नये भवन का निर्माण किया गया। यह भवन 1931ई. मंे तैयार हो गया जिसका
उद्घाटन श्री एल० डब्ल्यू रोनाल्ड (अजमेर मेरवाड़ा कमिश्नर) ने किया और इस
भवन मे सन् 1932 की जुलाई से कक्षा 9 से लेकर 12 तक की पढ़ाई की जाने लगी।
कक्षा 8 तक पुराने भवन मे रही जिसके हेड़मास्टर मुरारीलाल जी वर्मा बनाए गए
और साइंस के टिचर श्री देबी प्रशादजी माथुर बने हाई स्कूल के। हांलाकि
बिहारी लालजी ही प्रिन्सीपल रहे परन्तु उनको एक्जेक्शन नहीं मिला तब श्री
एम. के चक्रबर्ती कानपुर को स. ध. प्रकाशनी इण्टर कॉमर्स कालेज का
प्रिन्सीपल बनाया गया।
अब चूँकि 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतन्त्र हो गया और अजमेर मेरवाड़ा भी
अजमेर राज्य के नाम से स्वतन्त्र प्रान्त हो गया और ब्यावर उसका एक जिला
पूर्ववत बना रहा। 1952 में अजमेर राज्य में भी चुनाव हुए। अजमेर प्रान्त के
मुख्यमन्त्री श्री हरिभाऊ उपाध्याय मुख्य मंत्री और श्री बृजमोहनलालजी शर्मा
शिक्षा मन्त्री हुए। इन्होंने अक्टूबर 1954 में ब्यावर की म्युनिसिपल
प्राईमरी स्कूल व सहायता प्राप्त स्कूलों का प्रान्तीय करण कर दिया। सनातन
धर्म इण्टर कालेज (कक्षा 9 से 12) का भी प्रान्तीयकरण हो गया। कक्षा 8 तक
प्रबन्ध समिति के पास रही।
श्री मुकुन्ददासजी राठी अध्यक्ष और श्री गोविन्द नारायणजी माथुर मन्त्री ने
कालेज का भवन और लाखों रूपये का सब समान सन् 1955 में श्री बृजमोहनलाल जी
शिक्षा मंत्री को सौंप दिया। उनके प्रयास से स.ध. इण्टर कालेज को डीग्री
कालेज की मान्यता मिल गई। सन् 1956 की जुलाई से राजस्थान यूनीवर्सिटी से
एम.ए. कक्षाओं के लिए मान्यता मिल गई। इण्टर कॉमर्स कॉलेज की तरह यह कालेज
ही एकमात्र कॉलेज था जहाँ एम. ए. तक समाजशास्त्र पढ़ाया जाता है। इस प्रकार
स. ध. राजकीय कॉलेज अब पोस्ट ग्रेज्यूएट कालेज हो गया।
कालेज मे बी.ए. कक्षाएं खुलने पर इण्टर कालेज की नवी और दशवी कक्षाए पुराने
स्कूल के भवन में चली गई। वह भवन, राज्य सरकार ने किराये पर ले लिया था और
यहाँ पर देवीप्रशाद जी माथुर जो हाई स्कूल के साईस मास्टर थे हेड मास्टर
हुए। श्री देवी प्रशाद जी माथुर के इन्सपेक्टर आफ स्कूल बन जाने पर श्री
सी. पी. शर्मा इस स्कूल में हैंडमास्टर बन कर आये। श्री शर्माजी ने
नियामानुसार कक्षा 6 से 8 तक कक्षाएं और खोल दी इस स्कूल में। इस प्रकार यह
कक्षा छठी से दंसवी कक्षा तक पूरा हाई स्कूल हो गया। स्थानभाव के कारण यह
स्कूल मसूदा हाउस में आ गया। इसके बाद देलवाड़ा रोड पर इसका नया भवन बन जाने
पर वहां पर शिफ्ट कर दिया गया। अब यह स्कूल राज. स.ध. सीनियर हायर
सैेकेण्डरी के नाम से चल रहा है।
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