‘ब्यावर’ इतिहास के झरोखे से.......
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✍वासुदेव मंगल की कलम से.......

छायाकार - प्रवीण मंगल (फोटो जर्नलिस्‍ट)
मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर
Email - praveenmangal2012@gmail.com

21.07.2026

ब्यावर में शिक्षा का इतिहास
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रचनाकार: वासुदेव मंगल, ब्यावर सिटी

ब्यावर बड़ा ही सुन्दर नया नगर - मेरवाड़ा बफर स्टेट और अब राजस्थान प्रदेश का जिला बनाया गया है। स्थापना से सन् 1850 मे इसकी शिक्षा का सफर भी आरम्भ हुआ। इसके संस्थापक कर्नल चार्ल्स जॉर्ज डिक्सन शिक्षा के प्रति सृजनशील रहे। चूँकि यहाँ की पृष्ठ भूमि पोली कल्चर वाली रही। अतः अंग्रेजों के लिए ऑग्ल भाषा (ईसाई समुदाय के लिए) व्यापारिक वर्ग के लिए महाजनी और मुस्लिम समुदाय के लिए ऊर्दू भाषा की चौथी क्लास तक हालैण्ड नाम से एक स्कूल खोली सन् 1850 ई. मे रंग महल (अन्सारिया मेडीकल हॉल) के सामने का पण्डित मार्केट चौराहे के पूर्वी दक्षिणी कोने (कार्नर) पर। अतः शिक्षा की क्रान्ति का विगुल ब्यावर (नया नगर) मे एक सो पिचतर बरस पहले ही बज गया था। कितने दूरदर्शी थे डिक्सन पौने दो सदी पहले। चूंकि शिक्षा विकास की कुंजी है। ऐसे मे लेखक का इस विषय मे मानना है कि इसके उन्नयन को बनाये रखने के लिए शिक्षा की अविरल धारा जिला बनाये जाने पर भी रक्खी जानी चाहिए।
अब इस जिले की परिधि चालिस मील की है जिसकी जनसंख्या बारह लाख से ऊपर है ऐसी स्थिति मे इस जिले से आज की तालिम (शिक्षा) की पूर्ण रूप से सुचारू व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि जिले के विद्यार्थी को दूर अन्य जगह नहीं जाना पड़े। इसके लिए उच्च शिक्षा जैसे इंजिनियरिंग, मेडीकल लॉ कॉलेजेज खोले जाने की आवश्यकता है। इस जिले मे शिक्षा का वातावरण है बसावट के साथ शिक्षा इस क्षेत्र की पहचान रही है। ब्यौरेवार इतिहास पहला स्कूल हालेण्ड जिसका रूप म्युनिसिपल के साथ ही हालेण्ड म्युनिसिपल स्कूल - 1910 मे परकोटे के बाहर हाईवे के उत्तरी दिशा मे नई बिल्डिंग में 14 फरवरी 1910 ईसवी मे स्वतन्त्रता के बाद 1950 में इसका पटेल स्कूल नामकरण हुआ। 1956 मे यहाँ पर मल्टीपरपज की काष्ठ कला की पढ़ाई कुछ अर्से कराने के बाद बन्द कर दी गई। वर्तमान मे तीनो फैकल्टी ऑर्टस्, कॉमर्स, साईन्स में सीनियर सैकण्ड्री तक की पढ़ाई। सन् 1872 ई. मे चर्च के पास परकोटे के बाहर मिशन बायज् स्कूल (ईसाई मिशनरी) के द्वारा खोली गई। सन् 1900 ईसवी में बायज स्कूल के सामने हाईवे के उत्तरी दिशा मे मिशन गर्ल्स स्कूल खोला गया। इसी परिसर मे पहले लीयो स्याही का प्रिन्टिंग प्रेस था। साथ ईसाई गरीब बच्चों का हास्टल भी था। दूसरे नम्बर पर प्रकाशानन्दजी ने विनोदलालजी की गली बाँके बिहारी मन्दिर मे सन् 1904 ई0 मे प्रकाशनी पाठशाला खोली प्राईमरी जो बाद मे विनोदी लालजी के नोहर मे फिर डिग्गी मोहल्ले ब्रह्मा कुमारी वाले नोहरे मे फिर सन् 1910 में राठीजी की हवेली के सामने चौराहे के पूर्वी दक्षिणी कोने में सनातन धरम प्रकाशनी भव्य शानदार स्कूल का भवन (दो मन्जिला) सनातन धरम सभा द्वारा बनाकर शिफ्ट की गई। आप देखिये 2004 मे इसके सो साल का शताब्दी समारोह गिब्सन हास्टल के प्रांगण से मनाया गया। इस विद्यालय से पढ़े विद्यार्थी बड़ी बड़ी जगहों पर बड़ी-बड़ी पोस्टों पर आसीन रहे है। बड़े विद्वान धर्माचार्य हुए हैं। ब्यावर के जगन्नाथपुरी शंकराचार्य भी इसी संस्कृत स्कूल मे पढ़े। बड़े दुख के साथ लिखना न चाहते हुए भी लिखना पड़ रहा है कि लेखक स्वंय पाठशाला मे हायर सेकेण्डरी तक पढ़ाई इसी स्कूल में की है जो अब बन्द कर दी गई है बड़ी पीड़ा होती है शतायु शिक्षण संस्था का इस प्रकार बन्द कर दिया जाना सनातन धरम सभा द्वारा आश्चर्यजनक घटना है। इसकी जितनी भर्त्सना की जाए कम है। वास्तव मे यह तो धरोहर शिक्षण स्थल है। इसे कदापि बन्द नहीं किया जाना चाहिए। यह ब्यावर की विरासत है। आप हर ईमारत को वाणिज्यिकी बनाओगे क्या? सेठ दामोदर दास जी की धरम सहायिका सेठानी गंगाबाई मेटरनिटी होम भी जो शतायु पार कर चुका था। उसे भी बन्द कर दिया। खींवराजजी राठी द्वारा 1892 की कृष्णा क्लोथ स्पिनिंग एन्ड विविंग मिल्स भी शतायु होने के बाद 1996 को बन्द कर दी गई। ब्यावर में यह हो क्या रहा है क्या ब्यावर मे सभी कॉमर्शियल माइण्ड हो गए जो अपने पुरखों की याद खो रहे है एक-एक करके? बड़ी ताज्जुब की बात है।
शिक्षा की तीसरी पायदान पर ब्यावर की बात है। ब्यावर में सन् 1912 मे गोदावरी कन्या पाठशाला आर्य समाज धर्मावलम्बी गोदावरी बाई द्वारा खोली गई। इसका एक सो पन्द्रहवां साल चल रहा है। इसी आर्य समाज की गली में आर्य समाज शिक्षण संस्था द्वारा सन् 1975 ईसवी से दयानन्द आर्य विद्यालय (डी ए वी) कॉलेज चलाया जा रहा है जो कन्या महाविद्यालय है। सन् 1920 मे श्वेताम्बर जैन द्वारा शान्ति नाथ प्रभु के मन्दिर में शान्ति जैन स्कूल चलाया जा रहा था। यह स्कूल भी शतायु आते आते बन्द कर दिया, गया यह भी सो साल पुराना स्कूल था आप देखें सभी धर्मावलम्बी यहां आकर बसे थे। सभी ने अपने अपने धरम के नाम से शिक्षण संस्थाएं खोली और चलाई। अन्त में मुस्लिम समाज ने भी अजमेर रोड पुलिया के पास रोड़ के मोड़ पर पश्चिम उत्तर कोने में मोहम्मदली मैमोरियल स्कूल 1932 मंे भव्य ईमारत बनाकर शुरू की। यह स्कूल चल रहा है। 1928 से टाटगढ़ रोड़ पर चार मील पर जैन गुरुकुल स्कूल चलाया जा रहा है। सन् 1956 में इन सभी को सराकर द्वारा अधिगृहित करके चलाया जा रहा है। सनातन स्कूल बाद मे मसूदा हाऊस परिसर मे 1959 से व अब देलवाड़ा रोड पर खुद के परिसर मे चलाया जा रहा है। परन्तु मिडिल स्कूल सनातन सभा द्वारा चलाया जा रहा था और सेकण्ड शिफ्ट मे संस्कृत महाविद्यालय चलाया जा रहा था। जो अब बन्द कर दिया गया 1950 से मोतीलालजी चोखाणी द्वारा डिग्गी मोहल्ले में परिसर बनाकर गर्ल्स स्कूल चलाया गया। 1959 में छावणी रोड पर छावणी गर्ल्स स्कूल शुरू किया गया। डिग्गी गर्ल्स स्कूल भी शायद अब डिग्गी मोहल्ले से शिफ्ट कर दिया गया। इस प्रकार यह सभी विद्यालय सीनियर हायर सेकेण्डरी लेवल (स्तर) पर चल रहे हैं। अब तो ब्यावर मे प्राईवेट स्कूलों का भी कमोबेशी जाल बिछ गया है। वास्तव मंे ब्यावर शिक्षा का बड़ा भारी केन्द्र है।
अब जिला मुख्यालय होने से मेडीकल, इंजिनियरिग और लॉ कॉलेज शिघ्रताशीघ्र खोले जाने चाहिए। छात्रो का भार जिले मे बहुत अधिक होने से इसकी निहायत आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। अतः राज्य सरकार जिले की इस एनीवर्सरी पर मेडीकल कालेज की घोषणा करेगी ऐसी उम्मीद है।
 

इतिहासविज्ञ एवं लेखक : वासुदेव मंगल
CAIIB (1975) - Retd. Banker

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