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ब्यावर जिले के विकास की
प्रचुर सम्भावना
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स्वतन्त्र लेखक- वासुदेव मंगल, ब्यावर सिटी
जैसा कि आपको बताया गया है कि समय परिवर्तन शील है। काल के साथ साथ समय
बदलता रहता है। आपने ब्यावर के 191 साल के पीरियड में अनेक परिवर्तन देखे।
नया नगर परगना - मेरवाड़ा बफर स्टेट - अजमेर मेरवाडा स्टेट - अजमेर ‘स’
श्रेणी का राज्य - अजमेर जिले का सब डिविजन और अब ब्यावर जिला।
यह ईलाका मेर ट्राईवाल जाति रावत मेरात का निवास स्थान होने से क्रिटिकल
एरिया रहा है। अतः इसे आरम्भ मे अंग्रेजों ने आर्मी केन्टोनमेंट सन् 1823
मे बनाया।
सन् 1835 मे कर्नल चार्ल्स जार्ज डिक्सन ने इसे सिविल कोलोनी बसाकर वूल
एण्ड कॉटन का बिजनेस सेन्टर बनाया। तत्पश्चात् साथ ही बुलियन और ग्रेन का
ट्रेड सेन्टर भी बनाया। यह काल था एक सो इक्कीस साल का सन् 1835 से लेकर
1956 ईसवी तक का। भारत को अंग्रेज 1947 में आजाद कर अपने मादरे वतन ब्रिटेन
चले गये।
अब ब्यावर के जल-जंगल-जमीन आजाद हो गई जिसका उपयोग भी वैज्ञानिक तरीके से
सघन और सर्वांगीण किया जाना चाहिए था। मगर नही हो सका राजनैतिक द्वन्दता के
कारण अतः यह 1956 से लेकर 2026 तक सत्तर साल का ब्यावर के लिए पराभव का रहा।
इस प्रकार 121 साल उदभव और 70 साल पराभव।
अब चूँकि 7 अगस्त 2023 से ब्यावर जिला बनाया जा चुका है। अतः इसके विकास की
एक बार पुनः सम्भावना बनी है। निम्नलिखित घटक इसके विकास मे सहायक हो सकते
है:-
राजनैतिक इच्छा शक्तिः- सबसे पहले वर्तमान सिनेरियो मे भारत की केन्द्रिय
और राजस्थान प्रदेश की दोनो सरकारों की ब्यावर जिले के विकास करने की प्रबल
इच्छा शक्ति जागृत होनी चाहिए। तभी जाकर जिले का विकास सम्भव हो सकेगा। इस
क्षेत्र मे प्राकृतिक साधन प्रचुर मात्रा मे उपलब्ध है जिनका तकनीक के
उपयोग से वैज्ञानिक तरीकों से कर विकास किया जाना चाहिए।
क्रॉनिक ट्रेड एण्ड इण्डस्ट्रियल सेन्टर:- अतीत मे ब्यावर बुल एण्ड कॉटन का
ट्रेड का इण्डस्ट्रियल सेन्टर रहा है। इसका अनुभव वर्तमान मे काम आ सकता
है। अब काल के अनुसार परिस्थितियां जरूर बदल गई है। उनके अनुसार विकास किया
जाना चाहिए।
कच्चा माल:-जिप्सम के अकूत भण्डार से सिमेण्ट उद्योग लगाया जा सकता है।
फैल्सपार की वजह से सेनेट्री पोट, वाश बेसिन क्राकरी और टाईल्स उद्योग लगाए
जा सकते है। इसके लिए बिजली, पूंजी बाजार, सस्ता लेबर ट्रांसपोर्ट के साधन
रेडी मार्केट गोदाम आदि उपलब्ध है। जिप्सम से सिमेण्ट के कारखाने (प्लाण्ट),
फेल्सपार से टाईल्स उद्योग, ग्रेनाइट स्टोन का मार्केट डेवलप किए सकते है।
घने जंगल:- ब्यावर जिले की चारों ओर चालिस किलोमीटर के परिधि की पट्टी होने
से घने जंगल है जिससे फर्नीचर बनाने के कारखाने लगाये जा सकते है। इमारती
लकड़ी व जड़ी-बूटी जंगल से प्राप्त की जाकर दवाईयां बनाई जा सकती है।
सफारी गार्डन:- घने जंगलों मे जंगली जानवर विचरण करते है जैसे शेर, चीते,
बधेरे, हिरण, बारहसिंगा, नील गाय, लोमड़ी इत्यादि। अतः यहां पर सफारी गार्डन
बनाया जा सकता है।
पर्यटन स्थलः- इस जिले को पर्यटन केन्द्र के रूप मे विकसित कर सकते है
क्योंकि जयपुर, जोधपुर, अजमेर, पुष्कर, नाथद्वारा, चित्तौडगढ,़ उदयपुर के
मध्य ब्यावर जिला है। अतः पर्यटन स्थल की संभावना भी है। ब्यावर जिला चारों
तरफ के व्यापारिक मार्गों का केन्द्रिय स्थान है। रेल और सड़क (रोड़) का जाल
बीछा हुआ है यह दिल्ली अहमदाबाद शहरों का मध्य होने से ब्यावर का महत्व
बहुत अधिक है।
नगर निगम:- साठ वार्डों के कारण ब्यावर को नगर निगम मे क्रमोन्नत किया जा
सकता है।
संसदीय क्षे़त्र:- ब्यावर जिला संसदीय क्षेत्र बनाया जा सकता है क्योंकि
इसमे संसद क्षेत्र के सभी घटक मौजूद है अर्थात विधान सभा क्रमशः ब्यावर
जैतारण आसीन्द भीम सोजत और मसूदा शामिल होने के साथ साथ अन्य सभी संसदीय
क्षेत्र होने की शर्ते पूरी करता है जैसे जनसंख्या प्राशसनिक साधन आदि।
हवाई अड्डा:- ब्यावर मे हवाई अड्डा बनाया जाना आवश्यक हो गया है इसके लिए
अजमेर सराधना से मांगलियावास पीसांगन की पट्टी बनाई जा सकती है जिसका सर्वे
किया जा चुका है। क्योंकि यहाँ पर व्यापारिक केन्द्र के साथ साथ औद्योगिक
बस्ती भी है जहां पर बाहरी व्यापारियों का आवागमन वर्ष पर्यन्त बना रहता है
अतः हवाई यात्री भार राजस्व में ईजाफा करने का समुचित कारक हो सकता है।
अतः सरकार गौरकर विकास का प्रबन्ध करें ताकि जिले के साथ राज्य का भी
समुचित ग्रोथ हो सके। वाजिब जानकर सीनियर सिटीजन ने अपने अनुभव के आधार पर
लिखा है क्योंकि बिजनेस इण्डस्ट्रिज की क्रॉनिक सिटी होने से सरकार को
ज्यादा श्रम नहीं करना पड़ेगा। ग्रोथ के साथ डबल इंजन सरकार को बहुत अधिक
रेवेन्यु भी प्राप्त हो सकेगी।
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