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चिकित्सा का इतिहास
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रचनाकार: वासुदेव मंगल, ब्यावर सिटी
ब्यावर की 190 साल पहले चिकित्सा पद्धति आयुर्वेदिक रही। हालांकि एलोपेथिक
पद्धति पर आधारित शफा खाना ईसाई मिशनरी के समय सन् 1869 मे मेवाड़ी गेट के
चौराहे के उत्तरी-पश्चिमी कोने मे बरतानिया सरकार द्वारा खोला गया जहां पर
अंग्रेजी ईलाज की व्यवस्था 88 साल तक पूर्ण रूप से उसके बाद सन् 1956 से
डिस्पेन्सरी के तहत् ईलाज हो रहा है।
1892 मे कृष्णा मिल्स का हास्पिटल शाहपुरा मोहल्ला के पहले चौराहे के
उत्तर-पूरब कोने में श्रीमती सेठानी गंगाबाई मेटरनिटी होम के रूप मे राठीजी
द्वारा आरम्भ किया गया। 1909 में चम्पालाल रामस्वरूप द्वारा एडवर्ड मिल्स
की तरफ से डिग्गी मोहल्ला महादेव मन्दिर चौराहे के पश्चिम-दक्षिण कोने मे
शुरू किया गया दूसरा अस्पताल था। जहाँ चिरंजीलाल वैद्य थे। तीसरा औषधालय
तनसुखजी वैध द्वारा सुरजपोल गेट के अन्दर उनका निजी था। चौथा सन् 1925 मे
कुन्दनमल लालचन्द कोठारी द्वारा श्री महालक्ष्मी मिल्स के लिए मेवाड़ी बाजार
मे अपनी हवेली मे खोला जहां पर गोविन्द जी वैद्य कार्यरत थे। तिजारती
सररफान चैम्बर की ओर से डिग्गी मोहल्ले के चौराहे पर पिनारन मार्ग पर
औषधालय कार्यरत् रहा ।
वर्तमान मे ये सब बन्द हो गए। उसी समय का एक दवाखाना ओसवाल जैन समाज द्वारा
सेवा समिति औषधालय अभी भी चालू है। यह तो अतीत के ब्यावर शहर में कार्यरत
अस्पताल और औषधालय थे।
देश के स्वतन्त्र होने के बाद 1956 मे अमृतकौर हस्पिटल छावनी मिल्स मार्ग
पर खोला गया इसका नाम तत्कालिन स्वास्थ्य मन्त्री श्रीमती अमृतकौर के नाम
पर रखा गया जिसने इसकी 1954 ई0 मे नींव का पत्थर रखा और श्री गुलजारी नन्दा
ने इसका उद्घाटन किया। यह हास्पिटल ‘अ’ श्रेणी का अस्पताल रहा है जिस पर आस
पास के गांवों के लोग निर्भर है। अब चूंकि इस हास्पिटल को पुनः अपग्रेड कर
जिला अस्पताल की सारी सुविधाएं होनी चाहिए जहां पर प्रत्येक बिमारी के
स्पेशलिस्ट होने चाहिए। राज्य सरकार को जल्दी चालू करनी चाहिए क्योंकि
आसपास के करीब सौ गांवों के निवासी मेवाड-चख्चख्ष्मारवाड के गांवों के इस
हॉस्पिटल पर पिछले सत्तर साल से निर्भर है जब से यह खुला है। अब जिला
अस्पताल हो जाने से हर बिमारी के विशेषज्ञ जरूरी है जैसे किटनी, हार्ट आदि।
इनके अभाव में रोगी को अजमेर जाना पड़ता है। जिला अस्पताल की सार्थकता जरूरी
है। क्योंकि चालीस किलोमीटर के घेरे वाला जिला अस्पताल एकमात्र बड़ा अस्पताल
सरकारी स्तर का है जहां पर सभी रोगों के जांच की तत्काल सुविधा होनी चाहिए।
इसके अभाव मे जनता को भारी तकलीफ हो रही है। रोगियों को इधर उधर प्राईवेट
अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते है। प्राईवेट (निजी) अस्पतालों मे ईलाज भी
महंगा पड़ता है। रोगियों को भटकना पड़ता है। समय पर माकूल ईलाज न होने पर
केज्यूल्टी का डर बना रहता है। साथ ही असाध्य रोगों के ईलाज की व्यवस्था
निहायत आवश्यक है।
ब्यावर स्थापना से व्यापार का केन्द्र रहा है जहां सभी प्रकार की सेवाएँ
उपलब्ध रही अब जिले की आबादी लगभग 12 लाख से ऊपर है। अलग अलग संस्कृति वाला
अलग अलग तीन रियासतों का मिला जुला जिला है। चूँकि इसकी पृष्ठ भूमि गरीबी
आदिवासी ट्राईवाल रही है। अतः इसको सघन और सर्वागीण विकास करना अत्यन्त
महत्वपूर्ण है। प्राईवेट अस्पताल बहुत सारे है जहां गरीब लोगों का ईलाज
असम्भव है क्योंकि महंगा ईलाज उनके वश की बात नहीं है?
जैसा कि ट्राईवाल जाति वाला एरिया है। परन्तु बेकवर्ड क्लास ग्रामीण किसान
श्रमिक फौजी निवासी क्षेत्र मगरा मेवाड़ और मारवाड़ का स्वरूप है। पथरिली छोटी
छोटी पहाड़ियाँ खाईयों के साथ साथ सघन भयानक जंगल है जहां पर नो घाटे (दरे)
व चौबिस किले अवस्थित है। जंगली जानवरी के सफारी गार्डन के साथ साथ पर्यटन
स्थलों वाला ईलाका है। कपास, रवी एवं खरीफ की फसलों के साथ सब्जी पैदावार
का ईलाका है। चरागाहों के कारण ऊन वाला क्षेत्र है। राजस्थान का ब्यावर
मध्यवर्ती जिला है जहां चारों तरफ व्यापारिक मार्गों की कनेक्टिविटी है।
जयपुर-जोधपुर-उदयपुर का मध्य शहर साथ मे दिल्ली अहमदाबाद का मध्य रेल्वे
स्टेशन है। अत। ब्यावर का द्रूतगति से विकास जिले के रूप मे कर राज्य सरकार
फ्लैगशिप सरकार की योजनाओं में सक्रिय भूमिका अदा करे ऐसी सरकार से अपेक्षा
की जाती है। रोगी भार वाला जिला है। अतः विकसित अस्पताल वाला जिला होना
अत्यन्त आवश्यक है।
साथ ही जैसी इस जिले की पृष्ठांकित भूमि है। इसके लिए मेडीकल कालेज भी खोला
जाना जरूरी है क्योंकि यहां पर मेडीकल के छात्रों का भार बहुत ज्यादा होता
है दुर जाकर मेडीकल शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है।
अतः राज्य सरकार गौर फरमाकर ब्यावर मे जिला अस्पताल और मेडीकल कालेज की
सुविधा शीघ्रताशीघ्र सुलभ करायेगी ऐसी लेखक की अपेक्षा है। वाजिब जानकर एक
जागरूक सीनियर सिटीजन सामाजिक कार्यकर्ता की फरियाद और अपील है जिसे सरकार
द्वारा यथाशीघ्र अमलीजामा पहनाया जाना चाहिए, तब ही ब्यावर चहुँ दिशा विकास
कर सकेंग अन्यथा कदापि नहीं। अतःयह जिला सरकार का बहुत बड़ा राजस्व का जरिया
हो सकता चूंकि यहां पर सभी प्रकार की प्राकृतिक सम्पदा प्रचुर मात्रा मे
अवस्थित जमीन भरी दबी पड़ी है जमीन के ऊपर और नीचे। आवश्यकता है सरकार की
ईच्छा शक्ति के जागृत होने की। फिर आप देखियेगा ब्यावर जिले का विकास।
आवश्यकता है राज्य सरकार के मोटीवेट होने की।
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