|
‘ब्यावर’ इतिहास के झरोखे से.......
www.beawarhistory.com
✍वासुदेव मंगल की कलम से....... |
|
छायाकार - प्रवीण मंगल (फोटो जर्नलिस्ट)
मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर
Email - praveenmangal2012@gmail.com
|
|
|
 |
15 अगस्त 2026 को तिरंगे की आन बान शान का
80वाँ जश्न
------------------------------------
लेखक -वासुदेव मंगल, स्वतन्त्र लेखक, ब्यावर सिटी
असंख्यक कुर्बानियों के बाद 15 अगस्त 1947 को रात्रि को ठीक 12 बजे जब देश
ने आजादी मे सांस ली तब माना गया था कि अब तो राम राज्य आयेगा। पर राम
राज्य राजनैतिक पार्टी ही डिज़ोल्व करदी गई।
हुआ यों कि द्वितीय विश्व युद्ध मे ब्रिटेन की आर्थिक-राजनैतिक हालात
शोचनीय हो गए। तत्कालिन ब्रिटीश प्रधानमन्त्री लेबर पार्टी के लार्ड एटली
ने भारत को आजादी देने का मन बना लिया था।
इस व्यवस्था के लिए उन्होंने ब्रिटीश राज घराने के तत्कालिन सदस्य लार्ड
माऊण्ट बेटन को जो उस समय मलेशिया में नौ सेना के अडमिरल के पद पर आसीन थे
को जिम्मेबारी दी।
इधर सुभाष चन्द्र बोस के नेतृत्व मे आजाद हिन्द फौज मनीपुर मे लड़ाई करते
हुए गारो की पहाड़ी पर आ गई थी। उन्होंने जवाहर लाल नेहरू को मलेशिया जाकर
माऊण्टबेटन को समझाने के लिए भेजा कि आजाद हिन्दू फौज के दस हजार सिपाही जो
लाल किले मे बन्दी बनाए गए थे उनको छोड़ा जाये।
वहाँ जाने पर माऊण्टबेटन ने नेहरू से कहा कि हम भारत को आजादी देने जा रहे
हैं। इस पर नेहरू के मन में प्रधान मन्त्री बनने की महत्वाकांक्षा जाग गई।
इधर मुस्लिम लीग के मोहम्मदअली जिन्ना प्रधानमन्त्री बनने का ख्वाब देखने
लगे। बस इन दो व्यक्तियों की प्रधानमन्त्री बनने की लड़ाई ने भारत के टुकड़े
कराए।
माउण्टबेटन ने इस पर कहा आप लड़ो मत। आप दोनों को ही प्रधानमन्त्री बना देते
है। पहला प्रधान मन्त्री 14 अगस्त को पाकिस्तान का मोहम्मदअली जिन्ना होंगे।
फिर ठीक 15 अगस्त की रात बारह बजे भारत के प्रधान मन्त्री नेहरू होंगे। इस
प्रकार भारत को आजादी मिली। 15 अगस्त की रात ठीक बारह बजे पण्डित जवाहरलाल
नेहरू ने यूनियन जेक की जगह लाल किले की प्राचीर से आन बान शान का तिरंगा
फहराया। इस बात की गुनियासी साल हो गए। अस्सी वाँ आजादी का दिन है।
अब प्रश्न उठता है कि भारत की जँगे आजादी में ब्यावर का क्या योगदान रहा?
इसका उत्तर बड़ा संगीन है। ब्यावर के वैसे तो अनेक स्वतन्ता वीरों ने आजादी
की लड़ाई में सक्रिय योगदान दिया था। परन्तु मुख्य रूप से नो कर्मवीरों ने
स्वतन्त्रता सेनानियों ने जो अदम्य वीरता दिखाई वह इतिहास में अमर हो गई।
पहले थे श्यामजी कृष्ण वर्मा गेट पेट्रियट जिन्होंने इंग्लैण्ड मे लन्दन
में जाकर भारत की आजादी के लिए अंग्रेजों को इण्डिया हाउस की स्थापना कर
उनके घर में ललकारा। इसके लिए क्रान्तिकारी सन्यासी स्वामी दयानन्दजी ने सन्
1881 में ब्यावर प्रवास के दौरान उनके शिष्य श्यामजी वर्मा को प्रेरणा दी।
श्याम सन् 1875 ई० में ही ब्यावर आ गए थे जिन्होंने ब्यावर को ही अपनी
कर्मभूमि बनाली।
ब्यावर के दूसरे स्वतन्त्रता सेनानी थे तिलक युग के राणा प्रताप मान्यवर
ठाकुर गोपाल सिंहजी खरवा नरेश और तीसरे कर्मवीर तिलक युग के भामाशाह सेठ
दामोदरदासजी राठी वास्तव में इन दोनों के कारण ही ब्यावर भारतवर्ष मे जंगे
आजादी की लड़ाई में शीर्ष पर आया इनका योगदान ब्यावर को रचनात्मक भूमिका अदा
करने में रहा। गोपालसिंहजी ने श्यामगढ़ के किले मे हिन्दुस्तान सोशालिस्ट
रिवोल्यूशनरी आर्मी की शाखा खोली जहां स्वतन्त्रता सेनानियों को ट्रेनिंग
दी जाती। और सेठ दामोदर दास जी राठी ने ब्यावर मे देशी सूती कपड़े की मिल
खोली। इनके कारण ही ब्यावर में बीसवी सदी के पहले और दूसरे दशक में भारत के
बड़े स्वतन्त्रता सेनानी ब्यावर मे आये जैसे तिलक, यू.एन. ढेबर और शौकत
उस्मानी। 1916 मे नारी वर्ग ने क्रान्तिकारी सत्याग्रह किया जिसका
सभापतित्वं लोकमान्य बाल गंगा धर तिलक ने किया।
चौथे क्रान्तिकारी थे सेठ घीसूलालजी जाजोदिया। जाजोदियाजी ने अपनी सारी
कमाई स्वतन्त्रा की लड़ाई में अर्पीत की। इनके साथ थे पाँचवे क्रान्तिदूत
स्वामी कुमारानन्द। इस जोड़ी ने भी ब्यावर मे आजादी की लड़ाई में सक्रिय
भूमिका निभाई। चूँकि कांग्रेस मे दो दल थे। गरम दल और नरम दल। परन्तु
ब्यावर में गरम दल का बोलवाला था। अतः पूरे भारत से पंजाब, उत्तर भारत,
मध्य भारत, बंगाल प्रान्त और बम्बई प्रान्त के तमाम स्वतन्त्रता सेनानी
ब्यावर में आते थे। अतः ब्यावर जंगें आजादी का गढ़ था।
इसी श्रंृखला में छठे स्वतन्त्रता सेनानी भूपसिंह उर्फ विजयसिंह पथिक थे।
हालांकि पाथिकजी बिजोलिया किसान आन्दोलन के सर्वे सर्वा थे। परन्तु बाद मे
उन्होंने अपनी कर्मभूमि ब्यावर बनाली। और इसी कड़ी में ब्यावर के सातवें
स्वतन्त्रता के कर्मवीर बाबा नृसिंह दास जी थे जिन्होंने भी आखिर में अपनी
कर्मभूमि सन् 1931 में ब्यावर को बनाया। चूँकि ब्यावर स्वतन्त्रता की
गतिविधियों का खुला केन्द्र था इसीलिए ब्यावर माकूल जगह बनी जहाँ सृजन
कार्य आसानी से किए जाते।
ब्यावर की धरा पर क्रान्तिकारियों का सृजन, प्रशिक्षण, अधीक्षण का काम किया
जाकर देश के विभिन्न कोने मे भेजा जाता। अतः आजादी विरासत नहीं शहीदों की
अमानत है। भारत के कण कण में आज़ादी की सुगन्ध सुहासित है। आज के बच्चों को
इसे सहेजकर रखना है। यह उमंग और जोश का पर्व है। इस पर आँच नहीं आनी चाहिए।
ब्यावर वासियों में आजादी का नया जज्बा था। रात्री को ठीक 15 अगस्त को बारह
बजे पूजा स्थलों में आरती प्रार्थना हुई। लोग झूम उठे। जलुस निकाले गये। हर
घर में तिरंगा फहराया गया। एक अनोखा जोश उमंग नागरीकों में थी।
आजादी का दूसरा पहलू भिबत्स था। असंख्य लोगों की हिन्दूस्तान पाकिस्तान में
आवाजाही का नजारा रोंगटे खड़े करने वाला था। जगह जगह घरों मे आगजनी लूट पाट
व कत्ले आम के दृश्य दिखलाई दे रहे थे। अतः आजादी धरोहर के रूप मे नहीं मिली
थी वरन् शहीदों की असंख्य कुर्बानियों की अमानत और शहादत है। इसे अक्षुणत
बनाये रखना प्रत्येक हिन्दुस्तानी का फर्ज है।
आइए आज के दिन भारत के साथ साथ ब्यावर के भी आजादी के 80 वें पर्व पर
संवारने का ब्यावर जिले का प्रत्येक नागरिक सँकल्प ले ।
आजादी के पर्व पर तिरंगे की आन बान और शान को बनाए रखना है लेखक व परिजन की
इस पर्व पर देशवासियों को शुभ कामना।
आईये सब मिलकर भारत देश को पुनः सोने की चिड़िया बनाने के साथ साथ ब्यावर को
एक मॉडल जिला बनाये।
लेखक के पिता श्रद्धेय श्री बाबूलालजी ने भी 15 अगस्त की रात्री को 1947
में अग्रसेन बाजार में दुकान के ऊपर कमरे की छत की दिवार पर बीस फीट लम्बे
लोहे के पोल पर ढाई फीट लम्बे तिरंगें रेशमी मे गुलाब की पंखुडिया बांध कर
पोल पर दो सो बाट बल्ब लगाकर तिरंगा फहराया जो पोस्ट ऑफिस हाईवे से दिखलाई
दे रहा था। लेखक भी उस वक्त दो साल साढे दस महीने के थे। अतः लेखक को आज वो
समय याद, आ रहा है। चूंकि सामने जाजोदिया जी के बाजार वाले कटले के दूसरे
माले में कांग्रेस के दफ्तर में भी उस वक्त तिरंगा फहराया था। बाजार में
रघूनाथ जी के मन्दिर में आरती हो रही थी। हाथी के ओहदे पर बड़ा भारी जुलुस
निकला बाजार में। लेखक को यह सब याद हैआजादी का पहला जज्बा। उस बात को आज
गुनयासी साल हो गये है।
15 अगस्त 2026
|
|
|
ब्यावर के गौरवमयी अतीत के पुर्नस्थापन हेतु कृत-संकल्प
इतिहासविज्ञ एवं लेखक : वासुदेव मंगल
CAIIB (1975) - Retd. Banker
Website
http://www.beawarhistory.com
Follow me on Twitter -
https://twitter.com/@vasudeomangal
Facebook Page-
https://www.facebook.com/vasudeo.mangal Blog-
https://vasudeomangal.blogspot.com
Email id :
http://www.vasudeomangal@gmail.com
|
|
|